प्रतापगढ़ ज़िले के दिवाला गांव में पुलिस टीम पर हुए हमले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार महिलाओं के नाम पेपा बाई (43), कुशी बाई (40), मोहनी बाई (41), पूजा (25), निर्मला (32) और धापुड़ी बाई (55) हैं।
एसपी बी. आदित्य ने बताया कि कुछ दिन पहले गांव के एक युवक की मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों का आरोप था कि उसकी मौत के पीछे गांव के दूसरे पक्ष का हाथ है। युवक की मौत के बाद से ही दोनों पक्षों में तनाव का माहौल बना हुआ था। बुधवार को युवक की बरसी पर बड़ी संख्या में रिश्तेदार और लोग दिवाला गांव पहुंचे थे। इसी दौरान गुस्से से भरे लोगों ने दूसरे पक्ष के घर में आग लगा दी।
पुलिस पर लाठियों और मिर्च पाउडर से हमला: घटना की सूचना मिलने पर पुलिस कंट्रोल रूम से तुरंत टीम रवाना की गई। छह पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि ग्रामीणों ने पुलिस पर ही हमला बोल दिया। आरोप है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर लाठियों और पत्थरों से हमला किया। इतना ही नहीं, महिलाओं ने पुलिस की आंखों में मिर्च पाउडर भी फेंक दिया जिससे कई जवान घायल हो गए। हमले में घायल पुलिसकर्मियों को पहले आनन-फानन में अरनोद अस्पताल पहुंचाया गया। वहां से हालत गंभीर होने पर पुलिसकर्मी हरीश और बहादुर को जिला अस्पताल रेफर किया गया।
कई वाहन क्षतिग्रस्त, माहौल तनावपूर्ण: हमले में पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस टीम को अपनी सुरक्षा में पीछे हटना पड़ा और अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। जिला पुलिस प्रशासन ने हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। गांव में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की नई हिंसा को रोका जा सके।
गिरफ्तारी और आगे की जांच: पुलिस ने मौके से 6 महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जिन पर पुलिस टीम पर हमला करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और आगजनी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एसपी बी. आदित्य ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है। पुलिस पर हमला किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
घटना के पीछे पुराना विवाद
गांव के लोगों के अनुसार, घटना की जड़ में युवक की मौत है। युवक के परिजन आरोप लगा रहे थे कि उसकी मौत प्राकृतिक नहीं थी बल्कि गांव के दूसरे पक्ष की वजह से हुई। इसी को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में गहरा रोष था। बरसी के दिन यह गुस्सा हिंसा के रूप में फूट पड़ा।
पुलिस का कहना है कि यदि लोगों को कोई शिकायत या शक था तो उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था। हिंसा और आगजनी से स्थिति केवल बिगड़ती है और निर्दोष लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।
माहौल को शांत करने की कोशिश: घटना के बाद पुलिस अधिकारियों ने गांव में पहुंचकर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन लगातार ग्रामीणों से बातचीत कर माहौल को सामान्य करने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, दिवाला गांव में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि किसी ने फिर से कानून हाथ में लिया तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

