सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की दर्दनाक मौत, 29 घायल; 5 शिक्षक निलंबित, शिक्षा मंत्री बोले—“ज़िम्मेदार मैं ही हूँ”

राजस्थान के झालावाड़ जिले में पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से हृदयविदारक घटना हुई—जिसमें 7 छात्र बच्चों की मौत हुई और लगभग 29 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया।



घटना शुक्रवार सुबह लगभग 7:45 बजे की है, जब विद्यार्थी सुबह की प्रार्थना सभा के लिए इकट्ठा हुए थे। उस समय भवन की दीवार एवं छत गिरने से लगभग 35-40 विद्यार्थी मलबे में दब गए। 7 छात्रों की मौत हो गई, जिनमें 5 की मौके पर और 2 ने घायल अवस्था में अस्पताल में दम तोड़ दिया। लगभग 29 बच्चे घायल हुए, जिनमें से कुछ को जिला अस्पताल में रेफर किया गया और कई गंभीर हालत में हैं।

⚠️ पूर्व चेतावनी अनदेखी: शिक्षक मूकदर्शक

कुछ बच्चों ने बताया कि छत से पेब्बल गिरने की सूचना उन्होंने पहले दी थी, लेकिन शिक्षकों ने उन चेतावनियों को अनसुना करते हुए कहा—“कुछ नहीं होगा, वापस अंदर बैठ जाओ।” इसके बाद ही गिरी दीवार और छत ने तबाही मचाई।

🚧 निर्माण दोष या बारिश की मार?

यह स्कूल भवन 1994 में निर्मित था और हाल ही में इसे लिस्टेड “मरम्मत के लिए जरूरी” बताकर चिन्हित किया गया था।एक नया क्लास रूम (2011 का) बना हुआ था, पर पुरानी बिल्डिंग कमजोर स्थिति में थी। दो हफ्तों से हो रही भारी बारिश उक्त निर्माण की कमजोरी को और उभार सकती है।



5 शिक्षकों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है और प्रधानाचार्या को भी पद से हटाकर APO पर रखा गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा—“इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार मैं ही हूँ।” उन्होंने उच्चस्तरीय जांच और बच्चों का सरकारी खर्च से इलाज कराने की घोषणा की। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने पूरे प्रदेश में स्कूल भवनों की समीक्षा की मांग की और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तत्काल कदम उठाने को कहा।




स्थानीय ग्रामीण, शिक्षक और पुलिस मिलकर बचाव कार्य में जुट गए। जेसीबी मशीनों से मलबा हटाया गया, घायल बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ख़बर फैलते ही गाँव वासियों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, मृतकों के परिजनों को मुआवजा और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।