अभयदास महाराज फिर पहुंचे जालोर , चातुर्मास यहीं करने का ऐलान – प्रशासन सतर्क

जालोर।  राजस्थान में संत और प्रशासन के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। पाली के तखतगढ़ धाम के अभयदास महाराज सोमवार शाम फिर से जालोर लौट आए हैं। इससे पूर्व 18 जुलाई को उन्हें पुलिस द्वारा कथावाचन के दौरान रोका गया था और अनुमति के अभाव में उन्हें तखतगढ़ वापस भेज दिया गया था। इस घटनाक्रम ने पहले भी जालोर में भारी विवाद खड़ा कर दिया था, और अब उनकी वापसी ने फिर से प्रशासन और समाज के बीच हलचल पैदा कर दी है।



फेसबुक पोस्ट से किया आगमन का ऐलान

सोमवार शाम करीब 4:30 बजे, अभयदास महाराज ने एक फेसबुक पोस्ट कर खुद के जालोर में होने की जानकारी दी। पोस्ट में उन्होंने लिखा –

“अब किसी को यह कहने का अधिकार नहीं है कि कोई संत किसी भक्त के घर नहीं जा सकता। मैं जालोर में रहकर 8 अगस्त तक चातुर्मास का संकल्प पूरा करूंगा।” उनकी इस घोषणा के साथ ही पूरे शहर में उनके आगमन की खबर आग की तरह फैल गई। भक्तों में उत्साह की लहर दौड़ गई, वहीं प्रशासनिक हलकों में सक्रियता बढ़ गई।

क्या है विवाद : गौरतलब है कि 11 जुलाई को अभयदास महाराज ने जालोर में चातुर्मास आरंभ किया था। उन्होंने भक्तों के घर ठहरकर कथा-वाचन और प्रवचन शुरू किए थे। लेकिन 18 जुलाई को प्रशासन ने उन्हें कथावाचन रोकने को कहा और जालोर दुर्ग पर बायोसा मंदिर की यात्रा को बिना अनुमति अवैध बताते हुए उन्हें पाली के तखतगढ़ वापस भेज दिया गया। इस कार्रवाई के विरोध में हिंदू संगठनों और स्थानीय भक्तों ने सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किए थे। वहीं, सोशल मीडिया पर भी सरकार और प्रशासन के खिलाफ कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। इस विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता बनाम प्रशासनिक नियमों की बहस को फिर से जन्म दिया था।

प्रशासन अलर्ट मोड में : अभयदास महाराज की दोबारा वापसी के बाद जालोर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद सिंह ने बयान जारी कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा –किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट या धार्मिक उकसावे फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”जालोर के कलेक्टर और एसपी भी पूरे घटनाक्रम पर निगरानी बनाए हुए हैं। चूंकि इस मुद्दे पर पहले भी तनाव हो चुका है, इसलिए संभावित विरोध और समर्थन को लेकर खुफिया विभाग को भी सतर्क किया गया है।

राजनीति भी आई सामने – BJP व शिवसेना की कमेटी बनी: इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने संतों और नेताओं की एक 3 सदस्यीय समिति गठित की है, जो पूरे घटनाक्रम की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट तीन दिन में पार्टी को सौंपेगी। इसी तरह शिवसेना राजस्थान इकाई ने भी एक समानांतर समिति बनाई है।भाजपा की ओर से कहा गया कि “संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” शिवसेना ने भी प्रशासन पर धार्मिक भावनाओं को कुचलने का आरोप लगाया। इन समितियों के ज़रिए आगामी चुनावों को देखते हुए धार्मिक वोटबैंक को भी साधने की कोशिश के संकेत मिल रहे हैं।

अभयदास महाराज का बयान – “संकल्प नहीं तोड़ूंगा“: सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अभयदास महाराज ने कहा –”मुझे रोकने के पीछे षड्यंत्र है। जालोर कलेक्टर और एसपी ने मुझे भक्तों के घर जाने से रोका। क्या संत अब भक्तों से नहीं मिल सकता? मैं चातुर्मास का संकल्प लेकर निकला हूं, चाहे घूमकर जाऊं या छुपकर – लेकिन संकल्प नहीं तोड़ूंगा।” उनके इस बयान ने एक बार फिर धार्मिक भावना और प्रशासनिक आदेशों के बीच टकराव की स्थिति खड़ी कर दी है। वहीं, उनके समर्थक सोशल मीडिया और मंदिरों में जागरूकता फैलाने लगे हैं।