उदयपुर में चार मासूम जिनकी माइंस में डूबने से हुई मौत ,मुआवजे पर बनी सहमति,राजनीति विवाद बच्चों की मौत पर

उदयपुर। उदयपुर के डबोक थाना क्षेत्र की कुंवारी माइंस में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया। बारिश के पानी से भरी खदान में डूबने से चार मासूमों की मौत हो गई। इनमें तीन बच्चे और एक बच्ची शामिल थी। सभी बच्चे बकरियां चराने गए थे और नहाने के लिए पानी में उतरे थे। गहरे पानी में जाने से चारों की जान चली गई। इस घटना के बाद गांव में मातम पसर गया। हादसे के बाद रविवार शाम 4 बजे से सोमवार तड़के तक परिजन और ग्रामीण मृत बच्चों के शवों को लेकर माइंस के बाहर धरने पर बैठे रहे। वे लगातार प्रशासन से उचित मुआवजा और मृतक परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे थे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे और परिजनों के समर्थन में खड़े रहे।ग्रामीणों और परिजनों की ओर से शुरुआत में प्रत्येक मृतक को 10-10 लाख रुपये और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की गई थी। देर रात गुपड़ी के पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह, करणी सेना से अर्जुन सिंह और कई अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में प्रशासन के साथ लंबी वार्ता हुई। सोमवार अलसुबह समझौता हुआ और तय किया गया कि कुल 30 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। यानी प्रत्येक परिवार को लगभग 7.5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके बाद शवों को उठाया गया और एमबी अस्पताल मोर्चरी ले जाया गया।सोमवार सुबह एमबी अस्पताल की मोर्चरी में चारों बच्चों का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान परिजन भी मौजूद रहे। पुलिस ने प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए। बच्चों के शव गांव पहुंचते ही माहौल बेहद भावुक हो गया। हर आंख नम हो गई और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पोस्टमार्टम की कार्यवाही के दौरान वल्लभनगर की पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत भी मोर्चरी पहुंचीं। उन्होंने मृतक परिवारों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और इस दुःख की घड़ी में हर संभव मदद का आश्वासन दिया। शक्तावत ने माइंस मालिक से खदान और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के उचित बंदोबस्त करने की मांग उठाई। साथ ही उन्होंने सरकार से अपील की कि मृतक बच्चों के परिवारों को उचित और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए, ताकि उनका जीवन यापन कठिनाई में न फंसे।
इस हादसे के बाद ग्रामीणों और संगठनों ने प्रशासन और खदान मालिक की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में माइंस पानी से भर जाती है और आसपास कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। बच्चे और ग्रामीण अक्सर वहां नहाने या मवेशियों को चराने चले जाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में इस तरह की त्रासदी रोकने के लिए माइंस क्षेत्र को सुरक्षित किया जाए। चार मासूमों की एक साथ मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि यदि समय रहते सुरक्षा के उपाय किए गए होते तो ये हादसा टल सकता था। परिजन अब भी गहरे सदमे में हैं और बच्चों के जाने के बाद परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।