अरावली की वादियों और गुफा के बीच विराजित झामेश्वर महादेव

झामा नाम के चरवाहे से बने झामेश्वर

उदयपुर शहर से बीस किलोमीटर झामर कोटडा में भगवान झामेश्वर महादेव बिराजित है। झामेश्वर महादेव का नाम सुनते ही प्रकृति की गोद में गुफा में स्थित मन्दिर की छवि स्वतः उभर आती है। यहां झामेश्वर महादेव अति प्राचीन एक गुफा में बिराजित है। और यहां भक्त बड़ी तादाद में भी दर्शन के लिए पहुंचते है। यहाँ की चुना पत्थरो से निर्मित गुफा से भू वैज्ञानिकों ने कई वर्षो पुरानी बताया है। और यहां भोलेनाथ का अति प्राचीन शिवलिंग भी बताया जाता है।
झामेश्वर महादेव के पुजारी बताते हैं कि बरसों पहले झामा नाम के वृद्ध हुआ करते थे जो यहां गायों को चराने आते थे। उस समय यहां गायों का दूध यहां ही निकल जाता था जिस पर कुछ दिनों तक काफी दुखी हुए और 1 दिन यहां कर देखा तो कुछ अंदेशा हुआ और उसी रात को भगवान झामेश्वर महादेव ने उन्हें सपने में आकर दर्शन दिए थे। तभी से झामेश्वर महादेव के रूप में जाना जाता है। पुजारी बताते हैं कि किसी को संतान नहीं है तो यहां से पुष्प मांगते हैं तो भगवान उनको संतान जरूर देते है, साथ ही भक्तो की सभी तरह की मनोकामना भी झामेश्वर महादेव पूरी करते हैं। अरावली की वादियों और गुफा के बीच बैठे महादेव के दर पर प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं साथ ही यहां की प्राकृतिक और अरावली की वादियों का भी लुफ्त उठाते है।