
चित्तौड़गढ़। जहाँ एक ओर चित्तौड़गढ़ की धरती वीरता, त्याग और स्वाभिमान की प्रतीक रही है, वहीं अब यही भूमि संगीत, साधना और संस्कृति की भी सशक्त पहचान बनती जा रही है। इसी कड़ी में स्वरांजलि म्यूज़िकल ग्रुप की नई चित्तौड़गढ़ यूनिट ने अपने पहले ही आयोजन में ऐसा संगीतमय इतिहास रचा, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। स्वरांजलि म्यूज़िकल ग्रुप द्वारा महान अभिनेता ही-मैन धर्मेंद्र को समर्पित भव्य संगीतमय श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 45 कलाकारों ने सुरों के माध्यम से भावनाओं का सागर उमड़ दिया। धर्मेंद्र जी के संघर्ष, सरलता और सशक्त अभिनय को समर्पित गीतों ने श्रोताओं की आंखों में भावुकता और दिलों में उमंग भर दी।
चित्तौड़गढ़ यूनिट के संस्थापक बलेश जी गौर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आयोजन में उदयपुर के 26 एवं चित्तौड़गढ़ के 19 कलाकारों ने सहभागिता निभाई। मंच पर जब एक के बाद एक सुर-साधक अपनी प्रस्तुति दे रहे थे, तब यह स्पष्ट हो रहा था कि स्वरांजलि केवल एक म्यूज़िकल ग्रुप नहीं, बल्कि सुरों की तपस्या और सांस्कृतिक एकता का मंच है।

नारी शक्ति ने भावनाओं को दिया स्वर, पुरुष कलाकारों ने दिया संबल
इस कार्यक्रम की आत्मा बनी चित्तौड़गढ़ की नारी शक्ति, जिन्होंने आत्मविश्वास, भाव और माधुर्य से मंच को आलोकित कर दिया। नेहा जी वैष्णव, नूतन जी बेदी, अनीता जी शर्मा, निशा जी गौर, संगीता गोस्वामी जी, प्रीति माथुर जी, निशा कौशिक जी, ईशा कंवर जी, ऋतु कुलश्रेष्ठ जी, कृष्णा वैष्णव जी, पिंकी राज जी एवं सुमन टांक जैसी प्रतिभाशाली महिला कलाकारों ने यह सिद्ध कर दिया कि आज की नारी केवल श्रोता नहीं, बल्कि मंच की सशक्त धुरी है।
वहीं पुरुष कलाकारों ने भी पूरे समर्पण के साथ कार्यक्रम को ऊँचाइयों तक पहुँचाया। गजेंद्र जी सोनी, विकास जी स्वर्णकार, मोहन जी सोनी, योगेश जी उपाध्याय, सुशील जी वैष्णव, पुष्कर जी नायक, अरविंद जी थापा, सुरेंद्र जी दत्त, गोपाल जी गोठवाल, शितिज जी चुलेट, गौरव जी सोनी, निखिल जी माहेश्वरी, दिनेश सिंह थापा, सुरेश सिंह थापा, अंबा लाल साहू, धर्मेंद्र जी वैष्णव, यज्ञदत्त व्यास जी, विश्वा पंड्या जी, विकास जी गौर, अरविंद जी साल्वी, जगदीश जी साल्वी, संजय कोडाली जी, भगवतीलाल सालवी जी, चंद्र प्रकाश जी, गणेश जी, महेंद्र जी, नरेश रामचंदानी जी, शैलेंद्र निगम जी, कैलाश जी लोट एवं सप्रा जी ने अपनी सशक्त आवाज़ और अनुभव से मंच को मजबूती प्रदान की।
महिला और पुरुष कलाकारों के इस सुंदर समन्वय ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक उन्नति तभी संभव है, जब नारी शक्ति और पुरुष संबल साथ-साथ आगे बढ़ें।






प्रश्नोत्तरी ने जोड़ा इतिहास और मनोरंजन
कार्यक्रम के बीच-बीच में धर्मेंद्र जी के जीवन, संघर्ष और फिल्मी सफर से जुड़ी रोचक प्रश्नोत्तरी तथा चित्तौड़गढ़ के गौरवशाली इतिहास पर आधारित प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। इससे दर्शकों की सहभागिता और उत्साह कई गुना बढ़ गया और पूरा वातावरण जीवंत हो उठा।
सशक्त संचालन और आत्मीय समापन
कार्यक्रम का भावपूर्ण और अनुशासित संचालन नूतन जी बेदी, मोहन जी सोनी, गोपाल जी गोठवाल एवं भगवती जी द्वारा किया गया। समापन अवसर पर संजय जी कोडाली ने सभी कलाकारों, आयोजकों, सहयोगियों और उपस्थित संगीत प्रेमियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। दिनभर चले इस संगीतमय आयोजन का आनंद लगभग 100 से अधिक दर्शकों ने लिया। अंत में आपसी आत्मीयता, मधुर संवाद और स्वादिष्ट भोजन के साथ कार्यक्रम का भावनात्मक समापन हुआ। स्वरांजलि म्यूज़िकल ग्रुप की चित्तौड़गढ़ यूनिट ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में यह मंच न केवल संगीत प्रतिभाओं को अवसर देगा, बल्कि वीर भूमि चित्तौड़गढ़ को सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा।
