उदयपुर। झालावाड़ के स्कूल हादसे के बाद राजस्थान भर में सरकारी स्कूल भवनों की हालत पर सवाल उठने लगे हैं। इसी कड़ी में अब उदयपुर जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है और जिले में जर्जर हो चुके कक्षा-कक्षों को गिराने का काम शुरू कर दिया गया है।
सबसे पहले राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कदमाल में दो बेहद जर्जर कमरों को ध्वस्त किया गया। ये कमरे पहले से ही उपयोग से बाहर थे और बंद कर दिए गए थे। अब इन्हें पूरी तरह गिरा दिया गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का खतरा ना रहे। प्रशासन ने पास के अन्य स्कूलों में भी इसी तरह की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

100 से अधिक जर्जर स्कूल चिन्हित, जल्द होगी कार्रवाई: जिला प्रशासन ने शिक्षा विभाग के सहयोग से जिले के 100 से ज्यादा जर्जर स्कूल भवनों को चिह्नित किया है। इनमें से कई स्कूलों में 2 या उससे अधिक जर्जर कक्षा-कक्ष हैं। सभी ऐसे भवनों को जल्द गिराया जाएगा।
एक दिन पहले मंगलवार को जिला कलेक्टर नमित मेहता ने अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे जिले के राजकीय भवनों, सड़कों, पुलियाओं, आंगनवाड़ियों, अस्पतालों व बिजली खंभों की स्थिति का सर्वे करवाने के निर्देश दिए थे।
समिति गठित, तकनीकी टीमों की भागीदारी अनिवार्य: जिले के प्रत्येक उपखंड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वेक्षण के लिए विशेष समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों में तकनीकी अधिकारी व इंजीनियर शामिल किए गए हैं ताकि भवनों की वास्तविक स्थिति का सटीक आंकलन हो सके।
जिला प्रशासन ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने कार्यालय भवनों सहित अधीनस्थ सभी सरकारी परिसरों का निरीक्षण कर 5 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपें।
फील्ड विजिट और निरीक्षण में तेजी : प्रशासन की इस मुहिम के तहत कई अधिकारी अब फील्ड विजिट कर रहे हैं और स्थिति का सीधा मूल्यांकन कर रहे हैं। इसका मकसद किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले सावधानी बरतना और जान-माल की हानि रोकना है।

