उदयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य भर के होटल, धर्मशालाएं, सराय और अन्य ठहरने वाले व्यावसायिक स्थलों के लिए निर्देश जारी किया है। अब इन सभी संस्थानों को आने वाले हर व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा, चाहे वह रिकॉर्ड भौतिक रजिस्टर में हो या डिजिटल माध्यम से। अगर यह रिकॉर्ड नहीं रखा गया, तो संबंधित संस्थान के मालिक, संचालक या प्रभारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के गृह विभाग के शासन सचिव (विधि) रवि शर्मा ने इस बाबत विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें साफ कहा गया है कि कई संस्थानों में रुकने वालों का ठीक से रजिस्टर नहीं भरा जा रहा है और ना ही पहचान-पत्र लिए जा रहे हैं। ऐसे में न सिर्फ लोक व्यवस्था बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सभी संस्थानों को सख्ती से रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

किन संस्थानों पर लागू होंगे ये नियम
यह निर्देश सिर्फ बड़े होटलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नियम उन सभी संस्थानों पर लागू होंगे जहां कोई भी व्यक्ति रुकने आता है, जैसे:होटल,धर्मशालाएं,सराय,आश्रम,मुसाफिरखाना
गेस्ट हाउस,अन्य कोई ऐसा स्थान जहां वाणिज्यिक रूप से रुकने की सुविधा दी जाती है।
क्या-क्या रखना होगा रिकॉर्ड में?
संस्थान के प्रबंधक को रजिस्टर में निम्नलिखित जानकारी संधारित करनी होगी:
ठहरने वाले व्यक्ति का पूरा नाम
स्थायी पता
आने की तारीख
ठहरने का कारण
पहचान-पत्र की एक प्रति (जैसे – आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)
यदि ठहरने वाला नाबालिग है, तो उसका पहचान-पत्र लेना और उसके अभिभावक को सूचना देना अनिवार्य होगा।
संदिग्ध व्यक्ति होने पर क्या करना होगा?
अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार संदिग्ध लगे, या वह बिना सही दस्तावेज के ठहरने की कोशिश करे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित पुलिस थाने या चौकी को देनी होगी। साथ ही, यदि जांच एजेंसी, पुलिस अधीक्षक या जिला मजिस्ट्रेट रिकॉर्ड मांगें, तो वह रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध करवाना होगा।
लोक व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी कदम
गृह विभाग के अनुसार, कई बार होटल या धर्मशालाओं में रुकने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं होने के कारण पुलिस को किसी अपराध की जांच में मुश्किल आती है। इसके अलावा आतंकवाद, तस्करी, साइबर क्राइम, फर्जी पहचान और अन्य आपराधिक गतिविधियों को भी ऐसे संस्थानों का दुरुपयोग कर अंजाम दिया जा सकता है।
ऐसे में इन संस्थानों का कर्तव्य है कि वे न सिर्फ आगंतुकों की जानकारी लें, बल्कि उसे सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड में भी रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन उसे खंगाल सके।
कानूनी कार्रवाई भी तय
अगर कोई संस्थान इन निर्देशों का पालन नहीं करता है और बिना रिकॉर्ड के किसी को ठहराता है, तो उस पर राज्य सरकार द्वारा नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें लाइसेंस रद्द करने से लेकर जुर्माना और मुकदमा दर्ज होना तक शामिल है।
डिजिटल रजिस्टर भी मान्य
संस्थान चाहें तो परंपरागत कागजी रजिस्टर के स्थान पर डिजिटल रजिस्टर भी रख सकते हैं, बशर्ते वह रिकॉर्ड सटीक और सुरक्षित हो। डिजिटल रिकॉर्ड रखने से न केवल डाटा सुरक्षित रहेगा, बल्कि उसे आसानी से साझा भी किया जा सकेगा।
