उदयपुर में बदला लेने के लिए रची ऐसी साजिश की खुद खोदे हुए गड्ढे मे गिरे,15 कारतूस के साथ 3 गिरफ्तार!

कहावत है कि दूसरों के लिए खोदे गए गड्ढे में अक्सर इंसान खुद गिर जाता है, ऐसा ही एक वाक्या उदयपुर की हिरणमगरी थाना पुलिस के सामने एक कार्रवाई के दौरान आया। जब हिरणमगरी पुलिस ने तीन युवकों को 15 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। इन युवकों में दो सगे भाई हैं और तीसरा इनका परिचित। इनसे पूछताछ हुई तो बड़ी ही रोचक और अजीब घटना सामने आयी। इन्होंने ये कारतूस किसी वारदात के लिए नहीं, बल्कि किन्हीं दो लोगों को कारतूस रखने के मामले में फंसाने के षडयंत्र के तहत खरीदे थे। रमेश चंद्र लोहार कानोड़ के ही सोढाणा गांव निवासी तांत्रिक मोहन दास वैष्णव से मिला था। एक वर्ष पहले तांत्रिक विधि के जरिए रूपए डबल करने का झांसा देकर मोहनदास ने रमेश चन्द्र से 5 लाख रूपए हड़प लिए। पिछले एक वर्ष से रमेश मोहनदास से उसके 5 लाख रूपए वापस मांग रहा था, लेकिन तांत्रिक मोहनदास टालमटोल करता था। इसलिए रमेश मोहनदास वैष्णव से बदला लेना चाहता था। रमेश चंद्र लोहार कानोड़ के ही सोढाणा गांव निवासी तांत्रिक मोहन दास वैष्णव से मिला था। एक वर्ष पहले तांत्रिक विधि के जरिए रूपए डबल करने का झांसा देकर मोहनदास ने रमेश चन्द्र से 5 लाख रूपए हड़प लिए। पिछले एक वर्ष से रमेश मोहनदास से उसके 5 लाख रूपए वापस मांग रहा था, लेकिन तांत्रिक मोहनदास टालमटोल करता था।
थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि उदयपुर जिले के कानोड़ में अमरपुरा निवासी दो सगे भाई रमेश चंद्र लोहार और कैलाश चन्द्र लोहार पुत्र पन्ना लाल लोहार और इनके गांव के परिचित सुरेन्द्र सिंह शक्तावत पुत्र गटू सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 15 जिंदा कारतूस और एक बाइक बरामद की है। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि दोनों भाई रमेश और कैलाश पास के गांव के एक तांत्रिक मोहनदास वैष्णव से बदला लेना चाहते थे और सुरेन्द्र सिंह परिवार के भाई हिम्मत सिंह से परेशान चल रहे था और सबक सिखाना चाहता था। थानाधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपियों ने मिलकर योजना बनायी कि जिंदा कारतूस खरीदकर लाएंगे और मौका मिलने पर मोहनदास और हिम्मत सिंह की गाड़ियों में रखकर पुलिस को इसकी सूचना देंगे। पुलिस इन दोनों को आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार कर लेगी, इस तरह आरोपी मोहनदास और हिम्मत सिंह को झूठे मुकदमें में फंसाकर बदला लेना चाहते थे। इसी मंशा से इन्होंने 15 जिंदा कारतूस कहीं से खरीदे। ये तीनों बनायी प्लानिंग को अमल कर पाते, इससे पहले हिरणमगरी पुलिस की गिरफ्त में आ गए। इस कार्रवाई में कांस्टेबल कल्पेश पटेल और विजय सिंह की मुख्य भूमिका रही है।रमेश चंद्र लोहार कानोड़ के ही सोढाणा गांव निवासी तांत्रिक मोहन दास वैष्णव से मिला था। एक वर्ष पहले तांत्रिक विधि के जरिए रूपए डबल करने का झांसा देकर मोहनदास ने रमेश चन्द्र से 5 लाख रूपए हड़प लिए। पिछले एक वर्ष से रमेश मोहनदास से उसके 5 लाख रूपए वापस मांग रहा था, लेकिन तांत्रिक मोहनदास टालमटोल करता था। सुरेन्द्र सिंह शक्तावत अपने परिवार के भाई हिम्मत सिंह शक्तावत से परेशान था। हिम्मत सिंह ने गांव में मकान व जमीन पर कोर्ट से स्टे लिया हुआ हैं, इससे सुरेन्द्र सिंह मकान निर्माण नहीं करा रहा है और परेशान था। इसलिए सुरेन्द्र हिम्मत सिंह को झूठे मुकदमे में फंसाकर उसे सबक सिखाना चाहता था।