स्वरांजलि म्यूजिक ग्रुप ने वृद्धाश्रम में बिखेरी सुरों की बारिश, बुजुर्ग थिरके-गुनगुनाए

उदयपुर। रविवार की शाम सेक्टर 14 का तारा संस्थान वृद्धाश्रम किसी म्यूजिकल कॉन्सर्ट से कम नहीं लगा। मौका था स्वरांजलि म्यूजिक ग्रुप के सुर साधकों का, जिन्होंने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से न सिर्फ माहौल को सुरमयी बना दिया बल्कि वहां मौजूद करीब 90 बुजुर्गों को उम्र भूलकर नाचने-गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया।

बुजुर्गों संग “संगीत थेरेपी”: स्वरांजलि ग्रुप के संस्थापक विकास स्वर्णकार और सह-संस्थापक योगेश उपाध्याय ने बताया कि जब उन्हें वृद्धाश्रम के बारे में पता चला तो उन्होंने वहां संगीत कार्यक्रम करने का मन बना लिया। प्रबंधक सतीश कलाल ने भी इसे खुले दिल से स्वीकार किया और देखते ही देखते रविवार की शाम बुजुर्गों के नाम हो गई।

सुरों ने बुजुर्गों को लौटाया जवानी का जोश: कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई और फिर एक से बढ़कर एक गीतों ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।विकास स्वर्णकार ने “गीत गाता चल ओ साथी” सुनाया तो गजेंद्र सोनी ने “एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल” से जीवन का फलसफा बयां किया। क्षितिज चूलेट का “जिंदगी एक सफर है सुहाना” सुनकर तो कई बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं लेकिन होंठ गुनगुनाते रहे। इसके बाद योगेश उपाध्याय ने “दर्दे दिल दर्दे जिगर”, नेहा वैष्णव ने “ये गलियां ये चौबारा”, मनीषा दवे ने “हमें और जीने की चाहत ना होती” और प्रीति माथुर ने “गापुची गापुची गम गम” जैसे गानों से सभी को अपने जमाने की सुनहरी यादों में लौटा दिया।



जब बुजुर्ग भी थिरक उठे: युगल गीतों के दौर में तो माहौल पूरी तरह झूम उठा। “ना कजरे की धार”, “मैं दुनिया भुला दूंगा” और “जब कोई बात बिगड़ जाए” जैसे गानों पर बुजुर्गों ने तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। क्षितिज चूलेट के गाने “हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है” पर तो कई बुजुर्ग थिरकने लगे।

बुजुर्ग – नींव के पत्थर: सेवानिवृत्त तहसीलदार मोहन सोनी ने इस मौके पर कहा कि बुजुर्ग परिवार की नींव के पत्थर होते हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से ही नई पीढ़ी सही राह पकड़ती है। ऐसे कार्यक्रम उनके जीवन में नई ऊर्जा भरते हैं।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में विकास सोनी ने “मैं जट यमला पगला दीवाना”, गजेंद्र सोनी ने “रोते हुए आते हैं सब”, नेहा वैष्णव ने “कजरा मोहब्बत वाला” गाकर माहौल को रोमांच से भर दिया। वहीं मनीषा दवे ने “इतनी शक्ति हमें देना दाता” सुनाकर आत्मिक शांति का अहसास करा दिया।

अंत में स्वरांजलि ग्रुप और सभी बुजुर्गों ने मिलकर “चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना” गाकर कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

बुजुर्गों की मांग – “हर महीने हो ऐसा आयोजन”: कार्यक्रम के बाद वृद्धजन उत्साहित और प्रफुल्लित नजर आए। उन्होंने इच्छा जताई कि इस तरह का आयोजन हर महीने होना चाहिए।