उदयपुर। राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 मासूमों की मौत के ठीक एक दिन बाद, उदयपुर जिले के वल्लभनगर क्षेत्र के रूपावली गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी छत ढह गई। शुक्र रहा कि घटना रविवार को घटी, जब स्कूल बंद था, वरना एक और बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश देखा गया।

पहले ही जताई थी अनहोनी की आशंका
इस विद्यालय की हालत पिछले कई महीनों से खस्ताहाल थी। छत से प्लास्टर झड़ रहा था, दीवारों में दरारें थीं और बरसात में पानी टपकता था। अभिभावकों और ग्रामीणों ने कई बार स्कूल की हालत सुधारने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। 26 जुलाई को गांव के लोगों ने स्कूल पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन भी किया था और चेतावनी दी थी कि अगर कोई हादसा हुआ तो जिम्मेदार प्रशासन होगा।

हादसे के बाद मचा हड़कंप
रविवार सुबह अचानक स्कूल के एक कमरे की छत का बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि स्कूल में कोई छात्र या शिक्षक मौजूद नहीं था। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि सरकार और प्रशासन बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग: जिम्मेदारी तय हो और नई बिल्डिंग बने
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ये हादसा स्कूल के समय होता, तो दर्जनों बच्चों की जान जा सकती थी। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि स्कूल की पूरी बिल्डिंग की जांच कर तुरंत नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू किया जाए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने राज्य के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को फिर से उजागर कर दिया है। दो दिन पहले झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी और 9 गंभीर घायल हुए थे। वहां भी पहले कई बार शिकायतें की गई थीं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब उदयपुर की घटना ने राज्यभर के अभिभावकों को डरा दिया है।
बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार की ओर से चलाए जा रहे “हरियालो राजस्थान” और “स्मार्ट क्लास” जैसे अभियानों के बीच बुनियादी ढांचे की अनदेखी चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्रशासन जागता नहीं है।

