उदयपुर। देश प्रदेश में बुधवार को गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जा रही है. उदयपुर में भगवान श्री बोहरा गणेश जी के मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रही. हजारों साल पुराना यह मंदिर इतिहास और परंपरा के लिए दुनिया भर में विख्यात है. यहां भक्तों की मनोकामना भगवान श्री बोहरा गणेशजी पूरी करते हैं. गणेश चतुर्थी पर भगवान गजाननजी का बुधवार को विशेष शृंगार किया गया. मंदिर के पुजारी ने बताया कि उदयपुर शहर के बीचों बीच स्थापित भगवान बोहरा गणेशजी के मंदिर की स्थापना 500 वर्ष पहले की गई थी. इसकी विशेष मान्यता है. स्थापना महाराणा मोखल सिंह के राज में की गई थी. गणेश चतुर्थी के विशेष पूजन के लिए मंदिर को खास तरीके से सजाया गया. हर कोई गणपति बप्पा के दर्शन करते मनौती मांगते दिखा. इस मंदिर में विराजित गणेश भगवान को पैसे उधार देने वाले भगवान के रूप में जाना जाता है. पुजारी ने बताया कि बोहरा गणेश मंदिर में यदि शीश नवाकर कोई कार्य किया जाए तो वो जरुर सिद्ध होता है. मान्यता है कि बोहरा गणेश के भक्तों को कभी आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.उदयपुर की स्थापना के साथ ही बने बोहरा गणेश मंदिर का अलग ही महत्त्व है. इसके चमत्कार निराले है.चमत्कारों के लिए मेवाड़ संभाग में यह मंदिर खास है. सभी यहां विराजित भगवान गणेश की भक्ति में डूबे है. दरअसल बोहरा गणेशजी का यह मंदिर महाराणा मोखल सिंह के राज से स्थापित है, तभी से यहां भक्तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती गई. स्थानीय बाशिंदों के अलावा पूरे मेवाड़ संभाग के गणेश भक्त शुभ कार्यों से पहले बोहरा गणेशजी के दर्शन करने आते हैं.इसलिए नाम पड़ा बोहरा गणेशजी:पुजारी पीयूष ने बताया कि इस मंदिर का नाम बोहरा गणेशजी इसलिए पड़ा क्योंकि सदियों पहले यहां विराजित गणेश भगवान पैसे उधार देने का काम करते थे. दरअसल जरूरतमंद लोग अपने घरों के शुभ कार्यों के लिए भगवान से पैसे मांगने पहुंचते तो भगवान गणेश उन्हें निश्चित समयावधि के लिए जरूरत के अनुसार पैसे उधार दिया करते और काम होने और समयावधि पूरी होने पर पैसे लौटा दिए जाते थे. पुराने जमाने में पैसे उधार देने वाले को बोरा कहते थे. इस मंदिर को भी बोरा गणेशजी के नाम से जानते थे. धीरे-धीरे मंदिर का नाम बोहरा गणेशजी हो गया. पुजारी के अनुसार यहां शुभकार्यो को पूरा करने के लिए मांगी मनोकामनाएं पूरी होती है

