विद्यालय भवनों की जर्जर स्थिति पर उठी आवाज़: बाल सुरक्षा नेटवर्क ने संभागीय आयुक्त को सौंपा ज्ञापन,शिक्षा रुके नहीं, भवन गिरे तो वैकल्पिक व्यवस्था हो” – बाल सुरक्षा नेटवर्क


उदयपुर | हाल ही में पीपलोदी में घटित हादसे के बाद प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों की जर्जर स्थिति को लेकर चिंता और गहराती जा रही है। इसी कड़ी में बाल सुरक्षा नेटवर्क और शिक्षा का अधिकार मंच ने संयुक्त रूप से सोमवार को संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी को ज्ञापन सौंपा।

इस ज्ञापन में राज्य के स्कूलों, आंगनवाड़ियों और अस्पतालों की खस्ताहाल स्थिति को उजागर करते हुए शिक्षण कार्य के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई है, ताकि भवन की मरम्मत या निर्माण के दौरान शिक्षा बाधित न हो।



आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सबसे खराब हालात

बाल सुरक्षा नेटवर्क के संयोजक बी.के. गुप्ता ने कहा कि राजस्थान में कई सरकारी विद्यालय जर्जर अवस्था में हैं, खासतौर से उदयपुर संभाग, जो कि आदिवासी बहुल इलाका है। यहां के स्कूल भवन इतने खस्ताहाल हैं कि ना सिर्फ बच्चे, बल्कि शिक्षक भी उनमें पढ़ाने से कतराते हैं। उन्होंने चेताया कि यदि अब भी कार्रवाई नहीं की गई तो पीपलोदी जैसी घटनाएं फिर दोहराई जा सकती हैं।

शिक्षा का अधिकार मंच की एकता नंदवाना ने सरकार की हालिया घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि जब तक वे घोषणाएं धरातल पर लागू नहीं होतीं, तब तक बच्चों के साथ न्याय नहीं होगा।





प्रमुख मांगे, जो संभागीय आयुक्त के समक्ष रखी गईं:

1. सिविल सोसाइटी की भागीदारी सुनिश्चित हो – भवनों के भौतिक सत्यापन के लिए बनी समितियों में आमजन और सामाजिक संगठनों का भी प्रतिनिधित्व हो।


2. तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी अनिवार्य हो – ताकि भवन की वास्तविक स्थिति का सही तखमीना तय समय में तैयार हो सके, यदि जरूरत हो तो समयसीमा बढ़ाई जाए।


3. शिक्षा नहीं रुके – जिन भवनों को गिराने की सिफारिश हो, वहां समुदाय की भागीदारी से वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था तय की जाए। स्कूल किसी भी स्थिति में बंद न किया जाए।


4. बाल संरक्षण इकाइयों को सक्रिय किया जाए – पंचायत स्तर पर बाल अधिकारिता विभाग की समितियों का पुनर्गठन हो और नियमित बैठकें हो, जिससे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।


5. सूचना सार्वजनिक की जाए – जो भी भवन क्षतिग्रस्त हैं, उनकी जानकारी जन सूचना पोर्टल पर उपलब्ध करवाई जाए ताकि आमजन सूचनाएं देख सकें और अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकें।


6. सिर्फ अध्यापकों पर कार्रवाई ना हो – हादसों की ज़िम्मेदारी तय करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों, क्योंकि अक्सर सारा दोष सिर्फ अध्यापकों पर डाल दिया जाता है, जबकि सिस्टम में कई लोग जवाबदेह होते हैं।



संभागीय आयुक्त ने दिए कार्रवाई के आश्वासन

प्रज्ञा केवलरमानी ने ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को अवगत करवाने का आश्वासन दिया। साथ ही संभाग के सभी जिलों के कलेक्टर्स को इस दिशा में आवश्यक आदेश जारी करने की बात भी कही।


प्रतिनिधिमंडल में रहे ये सक्रिय सदस्य

ज्ञापन सौंपने आए प्रतिनिधिमंडल में बी.के. गुप्ता, एकता नंदवाना, डॉ. प्रीति जैन, राजेंद्र गामठ, याकूब मोहम्मद, सविता गुप्ता, रानू सालवी, नीलिमा बरना और सरफराज शेख शामिल रहे।