उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में हरियाली अमावस्या मेले की दूसरी—विशेष रूप से महिलाओं के लिए—दिन पर दर्शन देखने को मिला, जहां सहेलियों की बाड़ी से लेकर फतहसागर झील तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान दादी से लेकर बहू तक, सभी उम्र की महिलाएं उत्साह और उमंग से भरी रहीं। मेले का यह दूसरा दिन महिलाओं और लड़कियों के लिए समर्पित था, और पुरुषों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित था।

🌿 हरियाली अमावस्या मेला क्यों मनाया जाता है?

उदयपुर में इस पर्व की शुरुआत मेवाड़ राजघराने की रानी चावड़ी ने की थी। उन्होंने आग्रह किया था कि हरियाली अमावस्या के मेले का दूसरा दिन सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित हो, ताकि वे भी स्वतंत्रता और उत्सव का अनुभव कर सकें। तब से यह विशेष ‘सखियों का दिन’ बन गया।


मेला स्थल और आयोजन का स्वरूप
सहेलियों की बाड़ी मार्ग और फतहसागर की पाल पर प्रारंभ हुआ यह दो दिवसीय मेला, शुक्रवार को केवल महिलाओं के लिए खुला। नगर निगम एवं प्रशासन की ओर से मेले में कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए, ताकि सही व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
महोत्सव और लहरिया प्रतियोगिता
मेले में लहरिया प्रतियोगिता, पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, झूले, पुपाड़ियाँ, मिट्टी के बर्तन और हस्तशिल्प की दुकानों ने रंग जमा दिया।
महिलाएं पारंपरिक लहरिया पहनावे में मेले में आईं और सामूहिक गीतों व झूला झूलने का आनंद लिया।
लहरिया प्रतियोगिता में महिलाओं ने रंग-बिरंगे परिधान पहनकर भाग लिया और नगर निगम द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया गया।
मनोरंजन, व्यवस्था और सुरक्षा
सांस्कृतिक मंच पर कालबेलिया, गवरी नृत्य, कठपुतली शो, लोकगीतों की प्रस्तुति ने मेले को जीवंत बना दिया।
प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए—हर कोने पर पुलिस, होमगार्ड, महिला सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। सादी वर्दी में जवान भी मौजूद थे।


